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दिल की मुख्य नस फटने से मरीज की सांसे...डॉ.वर्मा
- दैनिक लोक भारती
- 26 Jul, 2026
पैर के रास्ते दूरबीन विधि से हो रहा है रोगियों का इलाज
नई तकनीक से पिछले दो सालों में हुए 250 से ज्यादा अपरेशन
कानपुर। अब दिल से निकलने वाली शरीर की सबसे मुख्य और चौड़ी रक्त वाहिका, जिसे एओर्टा कहा जाता है, उसमें आने वाली गंभीर दिक्कतों का इलाज अब पूरी तरह मुमकिन हो गया है। हृदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि पहले इस मुख्य पाइप में खराबी आने पर हमारे पास कोई पुख्ता इलाज नहीं था।
डॉक्टरों को अक्सर मरीजों से कहना पड़ता था कि जब तक दवाएं काम कर रही हैं, तब तक ही जिंदगी सुरक्षित है, लेकिन अब नई तकनीक ने इस लाचारी को खत्म कर दिया है। पिछले दो सालों में इस नई विधि से 250 से ज्यादा मरीजों के सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जिनके परिणाम बेहद शानदार रहे हैं।
एओर्टा हमारे दिल का वह मुख्य पाइप है जो पूरे शरीर में शुद्ध खून की सप्लाई करता है। कई बार गंभीर परिस्थितियों में या तो यह मुख्य नस अचानक अंदर से फट जाती है (जिसे मेडिकल भाषा में एओर्टिकडिसेक्शन कहते हैं) या फिर गुब्बारे की तरह फूलकर कमजोर हो जाती है (जिसे एन्यूरिज्म कहा जाता है)। पहले इन दोनों ही स्थितियों को जानलेवा माना जाता था क्योंकि दिल की इस सबसे बड़ी धमनी को खुला छोड़ना सीधे मौत को दावत देने जैसा था, लेकिन अब डॉक्टरों ने इसका ऐसा रास्ता निकाल लिया है जिसमें बड़े चीर-फाड़ की जरूरत ही नहीं पड़ती।
डॉ. राकेश वर्मा के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी को ठीक करने के लिए अब एंडोवैस्कुलर प्रोसीजर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पूरी तरह से एक दूरबीन विधि है। इसमें मरीज के पैर की नस के जरिए एक खास कवर्ड स्टेंट को शरीर के अंदर डाला जाता है। दूरबीन की मदद से इस स्टेंट को तैरते हुए ठीक उसी जगह तक पहुंचाया जाता है, जहां से दिल की मुख्य नस फटी होती है या फूली होती है।वहां पहुंचकर इस स्टेंट को खोल (डिप्लॉय) दिया जाता है, जिससे वह पूरा प्रभावित हिस्सा कवर हो जाता है
उन्होंने कहा कि चाहे दिल की मुख्य नस का फटना हो, उसका फूलना हो या फिर वयस्कों में नस का सिकुड़ना हो, अब मरीजों को इलाज के लिए कहीं बाहर भागने की जरूरत नहीं है। हमारे संस्थान में अब बेहद नियमित और रेगुलर बेसिस पर एंडोवैस्कुलर प्रोसीजर से ये जटिल ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जिससे सैकड़ों मरीजों को नया जीवन मिल रहा है।
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